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    क्रिप्टोकरेंसी ने डुबाया, करोड़ो रुपया स्वाहा चारो तरफ अफरा – तफरी का माहौल! भारत पर कितना पड़ेगा असर?

    बिटकॉइन डाउन: भारतीय निवेशक इससे कफी हद तक बचे रहे है जबकि बाहामास का एफटीएक्स बाजार लोगो द्वारा बिकवाली के बाद दिवालिया हो गया है!
    भारत में आरबीआई पहले दिन से ही क्रिप्टोकरेंसी का विरोध कर रहा है, जबकि सरकार शुरू में एक कानून लाकर ऐसे माध्यमों को विनियमित करने का विचार कर रही थी!

    विश्व में क्रिप्टोकरेंसी में आई बड़ी गिरावट से चारो तरफ अफरा – तफरी का माहौल है वही भारत में इसका खास असर नहीं हुआ है इसका श्रेय सरकार और भारतीय रिजर्ब बैंक आरबीआई के सतर्क रुख को जाता है! आरबीआई ने क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता देने से बार – बार इंकार किया है और उसने इसमें लेनदेन की मांग को काम करने के लिए कर का रास्ता चुना है! क्रिप्टोकरेंसी का बाजार 3 हजार अरब डॉलर था, जिसका कुल बाजार मूल्य अब एक हजार अरब डॉलर से भी कम रह गया है!

    भारतीय निवेशक इसे काफी हद तक बेच रहे है जबकि बाहामास का एफटीएक्स बाजार लोगो द्वारा बिकवाली के बाद दिवालिया हो गया है!
    भारत में आरबीआई पहले दिन से ही क्रिप्टोकरेंसी का विरोध कर रहा है, जबकि सरकार शुरू में एक कानून लाकर ऐसे माध्यमों को विनियमित करने का विचार कर रही थी हलाकि सरकार बहुत विचार – विमर्श के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंची की वर्चुअल मुद्राओ के संबंध में वैश्विक सहमति की आवश्यकता है क्योकि ये सीमा हीन है और इसमें शामिल जोखिम बहुत अधिक है!

    आरबीआई के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी को विशेष रूप से विनियमित वित्तीय प्रणाली से बचकर निकल जाने के लिए विकसित किया गया है और यह उनके सावधानी बरतने के लिए पर्याप्त कारण होना चाहिए!
    उद्योग का अनुमान है की भारतीय निवेशकों का क्रिप्टोकरेंसी परिसम्पतियों में निवेश केवल 3 प्रतिशत है! और वैश्विक क्रिप्टो बाजार में गिरावट के बावजूद, भारत की क्रिप्टोकरेंसी कंपनीया अभी तक किसी जल्दबाजी में नहीं है!
    भारत के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज “वजीरएक्स” और “जेबपे” का परिचालन जारी है!
    सरकार और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ केंद्रीय बैंक के सतर्क रुख की वजह से भारत में क्रिप्टो का बड़ा बाजार नहीं खड़ा हो सका अगर भारतीय संस्थाए क्रिप्टो में शामिल हो गई होती तो देश में कई लोगो के पैसे डूब जाते एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया (एएनएमआई) के अध्यक्ष कमलेश शाह के अनुसार, आरबीआई और सरकार द्वारा क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता नहीं देने के लिए उठाये गए कदम इस समय उचित है!
    रिजर्ब बैंक के गवर्नल शक्तिकांत दास ने भी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी को स्पष्ट खतरा बताया था!

    इस प्रकार कहा जा सकता है की विश्व में क्रिप्टोकरेंसी में आई बड़ी गिरावट से चारो तरफ अफरा – तफरी का माहौल है वही भारत में इसका खास असर नहीं हुआ है इसका श्रेय सरकार और भारतीय रिजर्ब बैंक आरबीआई के सतर्क रुख को जाता है! आरबीआई ने क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता देने से बार – बार इंकार किया है और उसने इसमें लेनदेन की मांग को काम करने के लिए कर का रास्ता चुना है! क्रिप्टोकरेंसी का बाजार 3 हजार अरब डॉलर था, जिसका कुल बाजार मूल्य अब एक हजार अरब डॉलर से भी कम रह गया है! भारतीय निवेशक इसे काफी हद तक बेच रहे है जबकि बाहामास का एफटीएक्स बाजार लोगो द्वारा बिकवाली के बाद दिवालिया हो गया है! और क्रिप्टो में शामिल हो गई होती तो देश में कई लोगो के पैसे डूब जाते एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया (एएनएमआई) के अध्यक्ष कमलेश शाह के अनुसार, आरबीआई और सरकार द्वारा क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता नहीं देने के लिए उठाये गए कदम इस समय उचित है!
    रिजर्ब बैंक के गवर्नल शक्तिकांत दास ने भी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी को स्पष्ट खतरा बताया था!

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